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गांड फाडू

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सुरेश दीक्षित मेरा बहुत पुराना दोस्त और लंगोटिया यार है. उसकी खास बात ये है की वो एक नंबर का चोदु आदमी है. उसको २४ घंटे चूत दिखती है, और चुदाई का वो दीवाना है. जवानी में हमने एक दुसरे को खूब चोदा, खूब ऐश किये. लेकिन अब मेरी उम्र हो गई है, जिसके कारण अब वो मुझे नहीं चोदता, लेकिन हमारी दोस्ती कायम है. उसे कम उम्र की लड़कियां पसंद है, इस चक्कर में अब तक वो भीख मागने और पन्नी बीनने वाली लडकियों तक को चोद चूका है. उसकी किस्मत अच्छी है की कभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा वर्ना उसके कारनामे तो ऐसे है की सारी उम्र जेल की चक्की पीसते हुए कटे. हम लोगो ने साथ में खूब चुदैया की है और कई बार लौड़े भी लगे है.

सुरेश दीक्षित की कुछ मजेदार हरकतों का छोटी कहानियो के रूम में आपके सामने पेश करुँगी. ये एकदम सच्ची कहानिया है, और व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है. अगर किसी के मन में किसी भी तरह की शंका या अविश्वास उठे तो मै उसकी बात सीधे सुरेश दीक्षित से करवा दूंगी.

तो लीजिये आपके सामने पेश है सुरेश दीक्षित की पहली कहानी….

सुरेश दिक्षित की मर गई गांड…

एक है सुरेश दिक्षित. दुनिया के सबसे सुपर चोदु. उनकी की एक खासियत ये भी है की एक बार पानी छोड़ने के २४ घंटे बाद ही लंड दुबारा खड़ा होता है. एक बार सुरेश दिक्षित एक ऐसे क्लब की सदस्यता मिली जहाँ सब नंगे रहते है. दिक्षित बिना कपड़ो के ख़ुशी ख़ुशी वहां रहने गए.

ये समुंदर के किनारे बनी एक बड़ी खूबसूरत कॉलोनी थी जहाँ सभी लोग नंगे घूमते थे। एक सुबह वह नंगे होकर घूमने निकले तो एक बहुत ही सेक्सी *** साल की नंगी लड़की सामने देखकर उसका लंड खड़ा हो गया। लड़की ने दिक्षित का तन्तानाया हुआ लौड़ा देखा तो अपने होठो में जीभ फिरती हुई दिक्षित के पास आई और बोली,”क्या आपने मुझे बुलाया?”

सुरेश दिक्षित : नहीं।

लड़की: लगता है आप नए आये हो, यहाँ का नियम है अगर आपका किसी लड़की को देखकर लौड़ा खड़ा हुआ मतलब आपने उसे बुलाया।

यह कह लड़की सुरेश दिक्षित को साइड में ले गई और खूब जम के लंड चुसाई की. जिससे दिक्षित को खूब मजा आया. फिर लड़की उसको लिटा के जबरदस्ती उसके उपर चढ़ के चोदने लगी. कंडोम न होने की वजह से डर के मारे दिक्षित ने तुरंत पानी छोड़ दिया. दिक्षित के अरमानो को जोर का झटका लगा क्योंकि अब वो २४ घंटे बाद ही खड़ा कर पायेगा. फिर भी उसको बहुत मजा आया. उसने सोचा की थोडा और घुमा जाये ताकि सेक्सी लडकियों को देखा शायद लौड़ा खड़ा हो जाये.

रास्ते में सुरेश दिक्षित ने जोर से पाद मारा तो सामने एक लंबा तगड़ा काला मुस्टंडा आदमी आया. उसका लौड़ा १ फुट का हलाव्वी लौड़ा था. उसकी नसे इंजन के पिस्टन की तरह तनी हुई थी. उसके लंड को देखकर दिक्षित के माथे में पसीने की बूंदे उभर आई और जीभ सूख गई. काला मुस्टंडा आदमी बोला, “यहाँ का नियम है अगर आपने पादा मतलब मुझे बुलाया है. बताइए मै आपकी क्या सेवा करू. दिक्षित के मुह से एक शब्द नहीं निकला, कभी वह हलाव्वी लौड़ा को देखते तो कभी काला मुस्टंडा आदमी को. दिक्षित अपने भौचाक्पने की स्थिति से बाहेर निकल भी नहीं पाए थे की उन्हें अपनी गांड में तीव्र असहनीय पीड़ा का अहसास हुआ. तगड़ा काला मुस्टंडा आदमी अपने १ फुट का हलाव्वी लौड़ा से दिक्षित की गांड मार रहा था. इंजन के पिस्टन दिक्षित की उन्चुदी गांड को विशालकाय गुफा में परिवर्तित कर रहा था. दिक्षित इस सदमे को बर्दाश्त न कर सका और बेहोशी की गोद में चला गया. तगड़ा काला मुस्टंडा आदमी ने सुरेश दिक्षित की गांड मार ली थी।

सुरेश दिक्षित अपनी गांड में मरहम-पट्टी करा वापस होटल आया और रिसेप्शनिस्ट से बोला, “मुझे चेक आउट करना है मुझे इस क्लब में नहीं रहना।”

रिसेप्शनिस्ट: सर सिर्फ एक दिन में जा रहे हैं? यहाँ बहुत सेक्सी और सुन्दर *** साल की लड़कियां भरी पड़ी हैं।

सुरेश दिक्षित :- “मादरचोद मेरी उम्र 56 साल है, मेरा लंड २४ घंटे में एक बार खड़ा होता है, और मैं एक दिन में 35 बार पादता हूँ।”

दिक्षित की बीवी डॉक्टर से बोली, डॉक्टर साहब मेरे पति मुझसे रोमांस नहीं करते।

डॉक्टर: ये लो 30 गोलियां, 1 गोली रोज खिलाना।

बीवी ने एक गोली दी. दिक्षित ने उस रात रोमांस किया।

अगले दिन उसने दो गोलियां दी तो दिक्षित ने खूब जोर से रोमांस किया।

तीसरे दिन उसने पूरी 27 गोलियां दूध में डालकर दिक्षित को पिला दी।

तीन दिन बाद डॉक्टर ने दिक्षित के बेटे से उसकी माँ का हाल पूछा तो बेटा बोला, “माँ मर गई, चाची और मौसी हॉस्पिटल में हैं, कामवाली भाग गई हैं, पड़ोस वाली आंटी ने पापा पे रेप केस ठोक दिया है, मेरा पिछवाड़ा अभी भी दुःख रहा है, छोटा भाई डर के झाड़ियों में छुपा है और पापा गार्डन में नंगे होकर टोमी (कुत्ते) के पीछे भाग रहे हैं।”

एक *** साल की कॉलगर्ल सुरेश दिक्षित से बोली, “अंकल आप एक बार कोशिश करो ना।”

सुरेश दिक्षित : मैं कर नहीं पाउँगा।

कॉलगर्ल: अरे आओ न दिक्षित अंकल कोशिश तो करो, कोशिश करने में क्या हर्ज है।

दिक्षित ताव में आ गया, बहुत दिनों के बाद किसी ने इतने प्यार से चूत चुदाई के लिए आमंत्रित किया था. वह कॉलगर्ल पे टूट पड़ा, उसकी ब्रा फाड़ के मम्मो को नोच डाला, मुह में लंड घुसा घंटो तक मुह चुदाई की और आखिर में ३ घंटे तक चोदने के बाद लड़की की पूरी तरह से फाड़ दी।

कॉलगर्ल: हाय रे मैं तो मर गई, कितने बड़े चोदु हो आप… कितना चोदते हो आप. आज तो आपने मेरी सुरंग को गुफा बना दिया है. मै तो अब एक हफ्ते तक किसी ग्राहक से चुद नई पाऊँगी. आपने ऐसा केसे किया, आप तो बोल रहे थे मैं कर नहीं पाउँगा?

सुरेश दिक्षित :- “वो तो मैं पेमेंट के बारे में बोल रहा था।”

सुरेश दिक्षित बचपन से हरामी थे. मुठ मारे बिना वो एक दिन भी नहीं रह पते थे. वो अपने गाँव की सभी आंटियो को तालाब में नहाते देख चुके थे. चूँकि वह स्वयं एक कलाकार और बचपन से ही कुशल चित्रकार थे इसलिए वह अश्लील पुस्तके खरीदने की बजाये स्वयं अपने हाथ से गाँव की मनपसंद औरतो के x -ray चित्र बनाया करते थे. इन चित्रों में वो अपनी संपूर्ण प्रतिभा को प्रदर्शित करते हुए स्त्री के हर अंगो को बेबाकी से दर्शाते थे.

सुरेश दिक्षित अपनी स्नातक की पढाई के लिए एक आर्ट इंस्टिट्यूट गए तो पिता ने कहा बेटा मैं हर महीने तुझे पैसे भेजता रहूँगा पर शर्त यह है की तुझे उसका पूरा हिसाब सही-सही देना होगा।

सुरेश दिक्षित ने भी अपने पिता की बात मानी और वैसा ही किया जैसा उसने कहा था।

पहले महीने के अंत में सुरेश दिक्षित ने पिता को हिसाब भेजा।

2000 रूपए कॉलेज की फ़ीस, 3000 रूपए हॉस्टल की फ़ीस, 1500 रूपए खाने के, और चार हज़ार रूपए चुदाई के।

सुरेश दिक्षित का हिसाब पढ़ पिता ने उसे पत्र लिखा और कहा, ” बेटा जो तुम हिसाब भेजते हो वो तो ठीक है परन्तु पत्र में चुदाई शब्द की जगह शिकार शब्द का प्रयोग किया करो क्योंकि वह पत्र तुम्हारी माँ भी पढ़ती है।”

पिता का पत्र पढ़ कर सुरेश दिक्षित ने अगले महीने का हिसाब भेजा, “2000 रूपए कॉलेज की फ़ीस, 3000 रूपए हॉस्टल की फ़ीस, 1500 रूपए खाने के, और 4000 रूपए शिकार के।

सुरेश दिक्षित का पत्र पढ़ कर पिता के होश उड़ गए तो उसने जवाब दिया, ” बाकी सब तो ठीक है पर शिकार का खर्चा कम करो।”

अगले महीने सुरेश दिक्षित ने फिर हिसाब भेजा और लिखा, “2000 रूपए कॉलेज की फ़ीस, 3000 रूपए हॉस्टल की फ़ीस, 1500 रूपए खाने के, और 2000 रूपए शिकार के।

पिता ने फिर सुरेश दिक्षित को जवाब भेजा, “शिकार पे खर्चा और कम करो।”

सुरेश दिक्षित ने चौथे महीने का हिसाब भेजा, ” 2000 रूपए कॉलेज की फ़ीस, 3000 रूपए हॉस्टल की फ़ीस, 1500 रूपए खाने के, और 500 रूपए शिकार के।

पिता ने जवाब भेजा, “शिकार पे खर्चा और कम करो।”

इसके बाद तीन महीने तक सुरेश दिक्षित ने पिता को कोई हिसाब नहीं भेजा तो पिता ने उसे पत्र लिखा, ” मादरचोद 3 महीने से तेरा कोई पत्र नहीं आया इसीलिए अब फ़टाफ़ट हिसाब भेज।

फिर अचानक एक दिन सुरेश दिक्षित का का पत्र आया, “2000 रूपए कॉलेज की फ़ीस, 3000 रूपए हॉस्टल की फ़ीस, 1500 रूपए खाने के, और 50000 रूपए बन्दूक की मरम्मत के।”

सुरेश दीक्षित की ठरक…

बीवी के कुछ दिनों से मायके में होने की वजह से दीक्षित को बड़ी ठरक चढ़ी हुई थी। एक दिन वो तंग आकर कोठे पे गया।

वहां दलाल ने सभी कॉलगर्ल्स के नाम कारों के नामों पर रखे हुए थे।

दलाल: कौन सी चाहिए? “हौंडा सिविक 10000 रुपये में, फोर्ड फिगो 8000 में, हुंडई i10, 6000 में, मारुती आल्टो 4000 में और टाटा नैनो सिर्फ 500 में।”

दीक्षित को काम ही चलाना था तो वह पैसे बचाने के लिए बोला, “नैनो ही दिला दो।”

दलाल थोड़ी देर के बाद एक हिजड़े को लेकर आ गया।

हिजड़े को देखते ही दीक्षित गुस्से से लाल पीला होता हुआ बोला, “अबे साले ये क्या है?”

दलाल मुस्कुराते हुए बोला, “सर नैनो का इंजन पीछे होता है।”

एक बार में बैठा एक दीक्षित अपनी जगह से उठ कर बाथरूम करने जाता है और जब वह वापस आता है तो गुस्से में आगबबूला होकर. उसकी चाल भी बदली हुई लग रही थी और वह जोरो से कुछ बडबडाता हुआ अपनी जगह पर आ कर बैठ गया।

यह देख होटल का वेटर उसके पास आता है और उससे पूछता है, ” कोई परेशानी है साहब आप बड़े गुस्से में लग रहे हैं?”

दीक्षित : कुछ नहीं बस अभी जब मैं मूत्रालय गया था तो पीछे से एक आदमी आया और उसने मेरे सिर पर बन्दूक रख दी और कहा कि या तो में उससे गांड मरवाउ नहीं तो वो मुझे गोली मार देगा।

तभी वेटर ने बड़ी उत्सुकता से पूछा, ” फिर क्या हुआ साहब।”

दीक्षित खिस्याते हुए बोला, “मादरचोद, गांडू क्या तुने गोली चलने कि आवाज़ सुनी ?”

एक बार दीक्षित एक किराने की दुकान पर गया और दुकानदार से बोला,” सूजी है ?”

दुकानदार: हाँ है।

दीक्षित : तो मरवायी क्यों थी भोंसड़ी के।

अगले दिन दीक्षित फिर उसी दुकानदार के पास जाता है और कहता है,” सूजी है”?

दुकानदार: नहीं है।

दीक्षित: तो दुकान क्या माँ चुदवाने के लिए खोली हैं भोंसड़ी के?

दीक्षित अपनी कुत्ती से बहुत परेशान था क्योंकि उसकी कुत्ती बच्चे नहीं दे रही थी। आखिर थक-हार कर वह एक कुत्ते की दुकान पर गया और बोला, “मुझे सबसे ज्यादा तेज़ और चोदू कुत्ता चाहिए।

दुकानदार ने उसे सबसे मस्त चोदू कुत्ता दे दिया।

दीक्षित ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर आया और कुत्ते को कुत्ती के साथ छोड़ दिया और कुत्ते से कहा, “देख बेटे हमें कोई जल्दी नहीं है, तू आराम से अपना काम करना।”

कुत्ते ने अन्दर घुसते ही कुत्ती की चुदाई शुरू कर दी।

दीक्षित यह देखकर बड़ा खुश हुआ ।

देखते ही देखते उसने कुत्ती को दो बार चोद दिया।

दीक्षित ने फिर कहा,”बेटे आराम से कर ले, कोई जल्दी नहीं है, तेरी तबियत खराब हो जायेगी।

कुत्ता फिर भी नहीं रुका और रात भर में, भैंस, बकरी, सूअर, बतख सब की चुदाई कर दी।

अगले दिन सुबह दीक्षित उठा तो उसने देखा कि कुत्ता चारों टाँगे ऊपर करके पड़ा हुआ था।

उसकी आँखें बाहर आ गई थी और जीभ भी लटकी हुई थी, और एक चील ऊपर मडरा (घूम) रही थी।

दीक्षित उसके पास जाकर बोला, “मैंने कहा था न बेटा कंट्रोल कर, मेरी बात मान ली होती तो ऐसा नहीं होता, जान गवानी पड़ गई ना?”

इतने में कुत्ता बोला, “साले भोसड़ी के दूर हो जा, चील नजदीक आ रही है उसको भी चोदना है।”

एक बार एक बहुत बड़े डॉन के घर में एक दीक्षित चोरी करने के लिए घुस गया और चोरी करने लगा।

पर इतने में ही आवाज़ सुन कर डॉन के तीनो बेटे जाग गए और दीक्षित चोर को पकड़ कर डॉन के पास ले गए।

डॉन को देख कर दीक्षित चोर उसके सामने गिडगिडाने लगा और अपनी की ज़िन्दगी दुहाई मांगने लगा, यह देख कर डॉन को उस पर तरस आ गया तो वह अपने तीनो बेटों से बोला।

डॉन: इस कमीने में हमारे घर में चोरी करने की कोशिश की है, परन्तु है तो यह भी इंसान ही, इसीलिए जाओ बेटों इससे ज़िंदा छोड़ दो पर इसे छोड़ने से पहले तुम तीनो बारी-बारी इसकी गांड मारो ताकि यह आगे से ऐसी गलती ना करे।

डॉन की बात सुन कर उसके बेटे दीक्षित चोर को एक कमरे में ले गए, और कपडे उतार कर उसकी गांड मारने की कोशिश करने लगे।

परन्तु जब काफी देर तक किसी भी लड़के का लंड दीक्षित की गांड में नहीं घुसा तो बड़ा बेटा डॉन के पास आया और बोला।

बेटा: पापा हम में से किसी का भी लंड उसकी गांड में नहीं घुस रहा।

डॉन: जाओ बेटा थोडा तेल लगा कर कोशिश करो।

डॉन की बात सुन लड़का वापस गया और वैसा ही किया जैसा उसके बाप ने कहा था, परन्तु फिर भी उसका लंड दीक्षित की गांड में नहीं घुसा तो वह वापस डॉन के पास आया और बोला।

बेटा: पापा तेल से भी बात नहीं बन रही।

डॉन: तो जाओ जाकर वैसलीन इस्तेमाल कर के देखो।

बेटा फिर लौट गया और वैसलीन लगा कर भी कोशिश की, परन्तु फिर भी बात नहीं बनी तो वह अपने बाप के पास वापस आया और बोला।

बेटा: पापा वैसलीन से भी नहीं घुस रहा।

यह सुन डॉन को गुस्सा आ गया तो वह चीख कर बोला,” तो फिर चाक़ू से उस बहनचोद की गांड फाड़ दो।”

दीक्षित जो की अन्दर वाले से कमरे से यह बातें सुन रहा था तपाक से चिल्ला कर बोला, ” जनाब एक बार थूक लगा कर भी कोशिश कर लेते तो बड़ी मेहरबानी होती।”

एक बार दीक्षित की आँखों में कुछ प्रॉब्लम आ गयी, तो उसकी आँखों का ऑपरेशन करना पड़ा।

ऑपरेशन हो गया तो डॉक्टर ने उसकी आँखों की पट्टी खोलनी शुरू की, और पूछा।

डॉक्टर: `कैसा दिख रहा है, अब आपको?`

दीक्षित : `डॉक्टर साहब मुझे कुछ नहीं दिख रहा है।`

डॉक्टर ने उसकी आँखें साफ़ की और फिर पूछा।

दीक्षित : `डॉ. साहब कुछ भी नहीं दिख रहा है।`

डॉक्टर ने कुछ सोचा और अपनी नर्स को कहा कि आप अपने कपड़े उतारो, फिर दीक्षित से पूछा।

दीक्षित फिर से बोला, `कुछ नहीं दिख रहा जी।`

डॉक्टर ने अपनी नर्स को ब्रा और पेंटी उतारने को कहा, और फिर पूछा।

दीक्षित : `नहीं जी सब कुछ काला काला है।`

डॉक्टर ने नर्स को कहा कि दीक्षित के सामने जाकर अपने बूब्स हिलाओ और चूत में ऊँगली डालो।

नर्स ने ऐसा किया, डॉक्टर ने फिर से दीक्षित से पूछा।

दीक्षित : `डॉक्टर साहब सच में मुझे कुछ नहीं नजर नहीं आ रहा है।`

डॉक्टर ने दीक्षित को जोर से एक थप्पड़ मारा और बोला।

डॉक्टर: `भोंसड़ी के कुछ भी नज़र नहीं आ रहा तो, तेरा लंड कैसे खड़ा हो गया है?`

सुरेश दीक्षित की बीवी उसे चोदने नहीं देती थी, तो दीक्षित नेहरू नगर के पास भदभदा के किनारे जाता और बतख से कहता है
“आओ बतख प्यारी,
बैठो जांघ पर हमारी,
खाओ पान सुपारी।”

एक दिन बीवी ने उसे बतख को चोदते देख लिया तो गुस्से में बतख की गांड में गरम सरिया डाल दिया।

अगले दिन फिर दीक्षित आता है और बतख से कहता है।

“आओ बतख प्यारी,
बैठो जांघ पर हमारी, खाओ पान सुपारी।”

तभी बतख कहती है,
“आई थी रांड तुम्हारी,
जला गई गांड हमारी,
माँ की चूत तुम्हारी,
भोसड़े में जाए पान सुपारी।….

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